नरसिंहपुर के दोभी में कैलाश श्रीवास्तव की मरम्मत दुकान पर काम बढ़ रहा था। महंगी वाइंडिंग मशीन के विकल्प में उन्होंने लगभग तीन साल लगाकर अपना मॉडल बनाया। NIF ने इसे 2005 के राष्ट्रीय नवप्रवर्तन सम्मान में दर्ज किया।

सामने तीन पिन से चक्करों की संख्या चुनी जाती थी। 360 के लिए सैकड़े में 3, दहाई में 6 और इकाई में 0 लगाया जाता था।

इलेक्ट्रॉनिक परिपथ चक्कर गिनता था। तय संख्या पूरी होते ही ऑटो-स्टॉप परिपथ रिले के जरिए मोटर रोक देता था।

स्थानीय पुर्जों में हाथ-पंप की पाइप, प्रेशर कुकर की गैस्केट और लकड़ी इस्तेमाल हुई। मशीन पंखे, कूलर, पंप, मिक्सर और ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग के लिए बनी थी।

मुख्य बातें

  • सैकड़ा-दहाई में 0–9, इकाई में 0 या 5 का चयन।
  • तय गिनती पूरी होने पर रिले मोटर रोकता था।

स्रोत और संदर्भ

  1. राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान–भारत (NIF) · Automatic Motor Winding Machine — Kailash Srivastava ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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